UP Shikshak Shikshamitra News: उत्तर प्रदेश में 20 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां हैं, लेकिन इस बीच शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले दिनों माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप को लेकर मिली राहत के बाद अब बेसिक शिक्षक विद्यालयों में समर कैंप के आयोजन को लेकर विरोध तेज हो गया है। शिक्षामित्र और अनुदेशक इस गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप में तैनाती को लेकर असंतुष्ट हैं। जबकि सरकार ने शिक्षकों को विकल्प दिया है कि वे चाहे तो समर कैंप में हिस्सा लें और उन्हें इसके लिए अतिरिक्त लाभ व छुट्टियां भी मिलेंगी, लेकिन शिक्षामित्र और अनुदेशक इस मामले में राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप पर विरोध तेज
विभिन्न शिक्षामित्र संगठनों ने गर्मियों में समर कैंप आयोजित करना अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और खुद शिक्षामित्रों के स्वास्थ्य की अनदेखी हो रही है। 21 मई से शुरू होने वाले समर कैंप में सिर्फ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को ड्यूटी लगाना उनके साथ अन्याय जैसा है। उनका सवाल है कि जब शिक्षक पूर्ण वेतन पा रहे हैं, तो केवल शिक्षामित्रों को क्यों समर कैंप में लगाया जा रहा है।
समर कैंप का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है
जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के मनोज मौर्य के अनुसार, गर्मी की वजह से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम है, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्याएं भी हैं और संसाधनों की कमी बनी हुई है। ऐसे में शिक्षामित्र और अनुदेशक की ड्यूटी लगाना उचित नहीं है। शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के राम सागर ने भी कहा कि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वास्तव में शिक्षामित्रों को गर्मी से कोई खतरा नहीं है, या उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। समर कैंप के लिए प्रत्येक विद्यालय को ₹6000 मानदेय और ₹2000 स्टेशनरी खर्चे के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 21 मई से 15 जून तक शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की तैनाती की जाएगी।
शिक्षामित्र संगठनों की चुप्पी पर सवाल
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ जैसे बड़े संगठन अभी तक समर कैंप को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दे पाए हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि जून के वेतन में भी देरी होती है और सरकार कमजोर कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रही है। उनकी मांग है कि अगर शिक्षामित्रों को समर कैंप में जाना पड़ता है, तो शिक्षकों को भी भेजा जाए। कुछ शिक्षामित्र तो कह रहे हैं कि शिक्षक छुट्टियों में कुल्लू-मणाली घूमने जाएं और शिक्षामित्र समर कैंप में, ऐसे कैसे समानता हो सकती है?





